प्रधान संगठन ने मांगे पूरी नहीं होने पर दी चेतावनी।


दुगड्डा। ग्राम पंचायतों को अधिक अधिकार, पर्याप्त बजट और ग्राम प्रधानों के मानदेय में बढ़ोतरी समेत विभिन्न मांगों को लेकर विकासखंड दुगड्डा के ग्राम प्रधान संगठन ने सोमवार को आवाज बुलंद की। संगठन के अध्यक्ष सरदार सिंह नेगी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान खंड विकास कार्यालय पहुंचे और खंड विकास अधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री उत्तराखंड के नाम 9 सूत्रीय मांगपत्र प्रेषित किया।

ग्राम प्रधानों का कहना है कि गांवों के विकास की सबसे पहली जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों पर होती है, लेकिन सीमित बजट, कम मानदेय और अधिकारों की कमी के कारण प्रधानों को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि सरकार ग्राम पंचायतों से विकास की अपेक्षा तो करती है, लेकिन पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।

मानदेय 20 हजार और पेंशन 15 हजार करने की मांग
मांगपत्र में ग्राम प्रधानों का मानदेय बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह करने तथा विधायक और सांसदों की तर्ज पर ग्राम प्रधानों को 15 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन देने की मांग की गई है। प्रधानों का कहना है कि ग्राम पंचायत स्तर पर लगातार जिम्मेदारियां बढ़ रही हैं, लेकिन उसके अनुपात में उन्हें मिलने वाला मानदेय बेहद कम है।

संगठन ने उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों को पिछड़ा क्षेत्र घोषित करने तथा पर्वतीय क्षेत्रों में विकास कार्यों के प्राकलन वहां की भौगोलिक एवं प्राकृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार करने की मांग भी उठाई।
ऑनलाइन व्यवस्था और नेटवर्क विहीन क्षेत्रों के लिए ऑफलाइन व्यवस्था की मांग

प्रधान संगठन ने क्षेत्र पंचायत सदस्यों, जिला पंचायत सदस्यों, विधायकों और सांसदों के कार्यों को भी अनिवार्य रूप से ऑनलाइन किए जाने की मांग की। वहीं नेटवर्क सुविधा से वंचित ग्रामीण क्षेत्रों में BV-RAMG योजना को ऑफलाइन माध्यम से संचालित करने की मांग की गई, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों की पंचायतों को तकनीकी समस्याओं के कारण विकास कार्यों में बाधा न उठानी पड़े।
मजदूरी बढ़ाने और समय पर भुगतान की मांग

प्रधानों ने अकुशल श्रमिकों की मजदूरी 600 रुपये प्रतिदिन और कुशल श्रमिकों की मजदूरी 900 रुपये प्रतिदिन किए जाने की मांग की। इसके साथ ही विकास कार्यों में प्रयुक्त सामग्री का भुगतान समय पर करने तथा जब तक पूर्व में किए गए कार्य का पूर्ण भुगतान न हो जाए, तब तक नया कार्य शुरू नहीं कराने की मांग भी की गई।
क्षेत्रफल के आधार पर मिले पंचायतों को बजट
प्रधान संगठन ने पंचायतों को जनसंख्या के बजाय क्षेत्रफल के आधार पर धनराशि आवंटित करने की मांग की। उनका कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों का भौगोलिक क्षेत्र काफी बड़ा है और कई गांव दूर-दराज के इलाकों में स्थित हैं। ऐसे में केवल जनसंख्या को आधार मानकर बजट निर्धारित करना ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उचित नहीं है।

संगठन ने ग्राम पंचायतों को 10 लाख रुपये तक के विकास कार्य स्वयं कराने की अनुमति देने की मांग भी की है, जिससे छोटी-छोटी विकास योजनाओं के लिए पंचायतों को बार-बार उच्च स्तर की स्वीकृति का इंतजार न करना पड़े और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य तेजी से हो सकें।
विकास और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रधान पर, लेकिन अधिकार सीमित
प्रधान संगठन के अध्यक्ष सरदार सिंह नेगी ने कहा कि ग्राम प्रधान गांव की सबसे छोटी और महत्वपूर्ण इकाई का निर्वाचित प्रतिनिधि होता है। गांव में विकास कार्य नहीं होने पर ग्रामीण प्रधान से सवाल करते हैं और किसी आपराधिक घटना के बाद भी प्रधान को ही जवाबदेह ठहराया जाता है, जबकि कई मामलों में प्रधान के पास न तो पर्याप्त बजट होता है और न ही आवश्यक अधिकार।
उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रभाव रखने वाले भू-माफिया और खनन माफिया के सामने शासन-प्रशासन के स्तर पर कार्रवाई में ढिलाई दिखाई जाती है, लेकिन इसका दोष भी ग्रामीण स्तर पर ग्राम प्रधानों के सिर मढ़ दिया जाता है।
सरदार सिंह नेगी ने चेतावनी दी कि यदि ग्राम प्रधानों की मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधानों की समस्याओं की लगातार अनदेखी का खामियाजा सरकार को राजनीतिक रूप से भुगतना पड़ सकता है।
ग्राम प्रधान संगठन ने कहा कि यदि पंचायतों को पर्याप्त अधिकार, बजट और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के साथ-साथ सरकार की योजनाओं को भी जमीनी स्तर तक बेहतर ढंग से पहुंचाया जा सकता है।






